Saturday, February 25, 2012

कैसे पत्थर को, लोग खुदा कर देते हैं

आ रही है समझ में  हर बात   परस्तिश  की "रजनी",
कैसे पत्थर    को,  लोग      खुदा     कर   देते  हैं |

Wednesday, February 1, 2012

तलाश लिया हमने पत्थरों में

जैसे तलाशता है ताईर  कोई ,उड़ान के   आकाश  को,
तलाश   लिया   हमने  पत्थरों  में, एक  अल्मास  को .  "रजनी"

Tuesday, January 24, 2012

इतनी मेहरबानियाँ दिखला कर, तुने ऐ ज़िन्दगी

तुझसे मांगी मुस्कराहट, मुस्कराहट तुमने दे दी,
तुझसे मांगी जीने की चाहत ,चाहत तुमने दे दी,
तुझसे मांगी ग़मों से राहत, राहत तुने दे दी,
इतनी मेहरबानियाँ दिखला कर, तुने ऐ ज़िन्दगी ?
मुझे उम्रभर के वास्ते अपना कर्ज़दार बना दिया."रजनी"

Tuesday, January 17, 2012

हर बार मुस्कुराने की कीमत ली ज़िन्दगी ने

"हर बार मुस्कुराने की कीमत ली ज़िन्दगी ने,
कहकहों में डूबा कर चश्म-तर कर दिया है. "रजनी"
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  यूँ  तो   कट  रहे   दिन     किस्तों   में,  गुजर    जायेंगे,
 राह पुरखार  या फिर   गुलों से भरे , सफ़र तो याद आयेंगे.

 "रजनी"

Sunday, December 11, 2011

ये इनाम कैसा जो सजा बन गई

मेरी खामोशियाँ ही सदा बन गयी,बेचैनियाँ जीने की वजा बन गयी,
दी  कैसी तुने  सौगात या  खुदा, ये  इनाम कैसा जो सजा बन गयी .

"रजनी "

Monday, September 19, 2011

मै वो गरीब हूँ

चंद क्षण भी ना मांगना तेरे दिए गए प्यार से ,
सूदखोर साहूकार जैसे ब्याज मांगता है ,
मै वो गरीब हूँ,
जिसके पास तेरा दिया ,
मूल भी कम है, ब्याज कैसे दूँ मै.

रजनी"

Thursday, September 8, 2011

जो कभी अपना था आज गैर है ,रह गए सुनकर अवाक् उस आवाज़ को क्या कहें तुम कहें कि आप ,
जो सिला बने थे आज वो घूलघूल कर टूट गए कानों में ,जब गूंज उठी आवाज़ कोई मंदिर की घंटियों जैसी ""रजनी"