Sunday, April 11, 2010

कितना सव्छ्न्द है ये सपना

कितना सव्छ्न्द है ये सपना ,
किसी भी पलकों पर अपना घर बना लेता है,
मिले ना मिले मंजिल ,
बस कर आबाद से निगाहों में फ़ना बना देता है .

10 comments:

  1. sapne to palkon ke tale apna sansaar banate hain, aur kisi shayar kee zindagi ka aadhar ban jate hain....

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  2. अपनेपन की अभिव्यक्ति । रचना प्रशंसनीय ।

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  3. रचना प्रशंसनीय ।

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  4. Antim pankti samajh nahi payi...! Bata saktin hain iska arth?

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  5. बस कर आबाद से निगाहों में फ़ना बना देता है .
    इसका माने आसान है ,फना बना देता है मतलब बर्बाद, खत्म

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